झारखंड के हजारीबाग में रामनवमी से पहले मंगला जुलूस पर पथराव हुआ, जिससे इलाके में तनाव फैल गया. आरोप है कि जुलूस जामा मस्जिद चौराहे से गुजर रहा था, जब कथित तौर पर भड़काऊ गाने बजाने से विवाद शुरू हुआ. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज और हवाई फायरिंग करनी पड़ी. देखें रिपोर्ट.
कोंडागांव में साहू समाज ने अपनी आराध्य देवी भक्त माता कर्मा की जयंती भव्य रूप से मनाई। इस अवसर पर भक्त माता कर्मा मंदिर परिसर, तेलीपारा में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। शोभायात्रा में स्थानीय लोगों के साथ फ्रांस से आए पर्यटकों ने भी हिस्सा लिया। यात्रा नगर के मुख्य मार्गों से होते हुए विभिन्न चौकों से गुजरी। स्थानीय लोगों ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। वहीं, जिले में बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति का प्रदर्शन होने जा रहा है। स्थानीय ऑडिटोरियम में 27 और 28 मार्च को बस्तर पंडुम 2025 का आयोजन किया जाएगा। जिसमें जनजातीय क्षेत्रों के कलाकार पारंपरिक लोककला का प्रदर्शन करेंगे। भक्त माता कर्मा की जयंती भक्त माता कर्मा मंदिर परिसर में विशेष कार्यक्रम रखा गया जिसमें तेजस्विनी मिश्रा और नीलकंठ साहू की टीम ने भजनों की प्रस्तुति दी। 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। माताओं के लिए सुरीली कुर्सी दौड़ प्रतियोगिता भी रखी गई। समाज सेवा में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अशोक साहू, पवन साहू, शिव साहू और शीतल साहू को सम्मानित किया गया। नवनिर्वाचित पार्षद श्रीमती पद्मिनी साहू और सहदेव साहू को भी सम्मान मिला। प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार दिए गए। शोभायात्रा के बाद खिचड़ी भोग का वितरण किया गया। शाम को लोगों ने घरों में दीप जलाए और रंगोली बनाई। रामायण पाठ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। कार्यक्रम में बस्तर विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष लता उसेंडी, नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष नरपति पटेल, छत्तीसगढ़ प्रदेश साहू संघ के प्रांताध्यक्ष टहल सिंह साहू समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। बस्तर पंडुम में दिखेगी आदिवासी परंपराओं की झलक इस दो दिवसीय महोत्सव में बस्तर संभाग के जनजातीय क्षेत्रों से कलाकार शिरकत करेंगे। वे अपनी पारंपरिक लोककला का प्रदर्शन करेंगे। इसमें शिल्प कला, तीज-त्योहार और खान-पान की झलक देखने को मिलेगी। कलाकार अपनी बोली-भाषा, रीति-रिवाज और वेशभूषा से दर्शकों को रूबरू कराएंगे। साथ ही पारंपरिक नृत्य, गीत-संगीत और नाट्य की प्रस्तुतियां भी होंगी। महोत्सव का मुख्य उद्देश्य जनजातीय कला और संस्कृति का संरक्षण है। इससे कलाकारों को प्रोत्साहन और सम्मान मिलेगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के अनुसार यह आयोजन बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाएगा। बस्तर पंडुम से क्षेत्र के कलाकारों को एक मजबूत मंच मिलेगा। यह उनकी कला को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में मदद करेगा।
Indian News 20 द्वारा इस दिन पोस्ट की गई रविवार, 13 दिसंबर 2020
Indian News 20 द्वारा इस दिन पोस्ट की गई रविवार, 13 दिसंबर 2020
Indian News 20 द्वारा इस दिन पोस्ट की गई रविवार, 13 दिसंबर 2020
Indian News 20 द्वारा इस दिन पोस्ट की गई रविवार, 13 दिसंबर 2020
Indian News 20 द्वारा इस दिन पोस्ट की गई रविवार, 13
Indian News 20 द्वारा इस दिन पोस्ट की गई रविवार, 13 दिसंबर 2020
Indian News 20 द्वारा इस दिन पोस्ट की गई रविवार, 13 दिसंबर 2020
Indian News 20 द्वारा इस दिन पोस्ट की गई रविवार, 13
Indian News 20 द्वारा इस दिन पोस्ट की गई रविवार, 13 दिसंबर 2020
Indian News 20 द्वारा इस दिन पोस्ट की गई रविवार, 13 दिसंबर 2020
© India News 20. All Rights Reserved. Design by PPC Service