भारतीय फिल्म इंडस्ट्री और क्रिकेट वर्ल्ड में ऐसे कई नामचीन चेहरे हैं जिन्होंने अपनी पढ़ाई तक पूरी नहीं लेकिन आज वो दुनियाभर में मशहूर हैं. यहां हम एक जानी-मानी भारतीय अभिनेत्री के बारे में बात कर रहे हैं जो न सिर्फ अभिनय बल्कि अपनी बेबाक बातचीत और क्यूटनेस के जरिए लाखों दिलों पर राज करती हैं. और उस हीरोइन ने अपनी स्कूली शिक्षा भी पूरी नहीं की लेकिन आज वो 4,600 करोड़ रुपए की मालकिन है और के बेटी की मां भी है.
राजस्थान के राज्य शिक्षा और पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने शिक्षा संजीवनी योजना की घोषणा की है। इसका लाभ कक्षा 1 से 5वीं तक के बच्चों को मिलेगा। ये घोषणा बुधवार को उदयपुर के रेजिडेंसी गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल में हो रहे एक इवेंट के दौरान की। राज्य में इस तरह की ये पहली स्कीम है। इसमें वंडर सीमेंट, ज्यूरिख कोटक जनरल इंश्योरेंस, एसबीआई तथा एसएमई इंश्योरेंस प्रमोशन काउंसिल सरकार का सहयोग कर रहे हैं। इसके तहत उदयपुर डिवीजन के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले करीब 1.3 लाख स्टूडेंट्स को 1 लाख तक के कवर वाला पर्सनल एक्सीडेंट इंश्योरेंस दिया जाएगा। शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि अगर किसी स्टूडेंट के पेरेंट की एक्सीडेंट में मृत्यु हो जाए तो ये भी इंश्योरेंस में कवर किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल ये स्कीम सिर्फ उदयपुर डिवीजन के लिए लॉन्च की गई है। जल्द ही इसे पूरे राजस्थान में लॉन्च किया जाएगा जिससे करीब 1 करोड़ स्टूडेंट्स को लाभ मिलेगा। स्कीम लॉन्च करने का उद्देश्य, पढ़ाई न छूटे ये स्कीम लॉन्च करने का उद्देश्य है कि स्टूडेंट्स की पढ़ाई जारी रहे। इसके अलावा इसका उद्देश्य चाइल्ड लेबर रोकना, डिजिटल इंडिया के जरिए फाइनेंशियल इन्क्लूजन करना, इंश्योरेंस क्लेम अमाउंट्स का गलत इस्तेमाल रोकना और कम उम्र से ही बच्चों में सेविंग की आदत डेवलप करना है। इस स्कीम के जरिए माता-पिता की अचानक मृत्यु होने पर स्टूडेंट्स को 18 साल की उम्र तक स्कॉलरशिप दी जाएगी। एजुकेशन से जुड़ी ऐसी ही और खबरें पढ़ें... नेशनल साइंस डे आज:कैंसर की पहचान, मंगल ग्रह पर खोज, सबके पीछे है रमन इफेक्ट; इसी के चलते एशिया में पहली बार आया नोबेल आज 28 फरवरी को देशभर में नेशनल साइंस डे मनाया जा रहा है। ये दिन भारत रत्न और नोबेल प्राइज विजेता साइंटिस्ट और फिजिसिस्ट चंद्रशेखर वेंकटरमन यानी CV रमन के काम को सेलिब्रेट करने के लिए मनाया जाता है। पूरी खबर पढ़ें...
कभी-कभी शास्त्रों में ऐसी बात आ जाती है कि लोग भ्रम में पड़ जाते हैं। ऐसे में उसके आगे-पीछे की पंक्तियों को पढ़कर संदर्भ ठीक से समझना चाहिए। रामचरित मानस में तुलसीदास जी ने लिखा है- ‘उपरोहित्य कर्म अति मंदा। बेद पुरान सुमृति कर निंदा’ यानी पुरोहिती कर्म बहुत ही नीचा है। वेद, पुराण और स्मृति इसकी निंदा करते हैं। आज जो लोग पुरोहिती का काम करते हैं उनके लिए तो ये चिंता का विषय है। ये बात श्रीराम से गुरु वशिष्ठ ने कही थी। लेकिन उन्होंने इसके बाद ये भी कहा- पुरोहित कर्म बुरा नहीं है। वे कहते हैं मैंने हृदय में विचार किया, जिसके लिए योग, यज्ञ, व्रत और दान किए जाते हैं। उसे मैं इसी कर्म से पाऊंगा। इसके समान कोई दूसरा धर्म भी नहीं है, ब्रह्मा जी ने मुझे प्रेरित किया और राम मैंने आपको पा लिया। पुरोहित कर्म से ईश्वर को पा सकते हैं। ईश्वर को हम जो भी नाम दें। पर परमात्मा जीवन में उतर आए तो इससे बड़ी क्या उपलब्धि होगी।
Indian News 20 द्वारा इस दिन पोस्ट की गई रविवार, 13 दिसंबर 2020
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