Fastest Triple Hundreds Record in Test: टेस्ट क्रिकेट में सबसे तेज तिहरा शतक लगाना एक अविश्वसनीय उपलब्धि है जो किसी भी बल्लेबाज के लिए गर्व की बात है. इस उपलब्धि को हासिल करने के लिए बल्लेबाज को तेजी से रन बनाने होते हैं, जो कि टेस्ट क्रिकेट में एक चुनौतीपूर्ण काम है. आइए एक नजर डालते हैं उन टॉप बल्लेबाजों पर जिन्होंने टेस्ट क्रिकेट में सबसे तेज तिहरा शतक जमाया है.
हर मां-बाप अपने बच्चे को खुश रखना चाहते हैं। उसे खूब लाड़, प्यार, दुलार देते हैं। वह बच्चे की हर छोटी-बड़ी ख्वाहिश को पूरा करने की कोशिश करते हैं, लेकिन कभी-कभी यही प्यार और दुलार पेरेंट्स के लिए परेशानी बन जाता है। ज्यादा लाड़-प्यार के कारण बच्चे जिद्दी हो जाते हैं। जब जरा सी जिद करने पर पेरेंट्स बच्चे की हर बात मान लेते हैं तो बच्चा यह समझता है कि उसे अपनी इच्छाएं पूरी करवाने के लिए जिद करनी चाहिए। इससे बच्चे का जिद्दीपन बढ़ता है और धीरे-धीरे ये उसकी आदत बन जाती है। अगर बचपन में ही इसे रोका न जाए तो बड़े होकर ये आदत बन सकती है, जो करियर और पर्सनल लाइफ को प्रभावित कर सकती है। हालांकि बच्चों की जिद्द हमेशा इच्छाओं की पूर्ति के लिए नहीं होती है। कई बार किन्हीं खास मेडिकल कंडीशन की वजह से भी बच्चे जिद्दी हो सकते हैं। इसका भी समय पर इलाज कराना जरूरी है। आज रिलेशनशिप कॉलम में हम बच्चों के जिद्दी स्वभाव के बारे में बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- बच्चा जिद्दी क्यों होता है? कई पेरेंट्स ऐसा सोचते हैं कि ‘बच्चे हैं, जिद और शैतानी तो करेंगे ही।’ बच्चों के जिद्दी होने का सबसे बड़ा कारण यही है। कुछ बच्चों में उनका जिद्दी स्वभाव अपोजिशनल डेफिएंट डिसऑर्डर (ODD) या अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (ADHD) जैसी प्रॉब्लम्स की वजह से भी हाे सकता है। इन दोनों स्थितियों में बच्चे गुस्सैल हो जाते हैं और किसी भी चीज पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते हैं। इसके अलावा बच्चों के जिद्दी होने के पीछे कई और कारण हो सकते हैं। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए- बच्चे के जिद्दी होने में पेरेंट्स की भूमिका अहम बच्चे के जिद्दी होने में पेरेंट्स की परवरिश की बड़ी भूमिका है। पेरेंट्स ही बच्चे के लिए पहले रोल मॉडल होते हैं। जब पेरेंट्स खुद संयमित रहते हैं, अपनी भावनाओं पर कंट्रोल रखते हैं तो बच्चे भी यही आदत सीखते हैं। अगर पेरेंट्स खुद गुस्से में चिल्लाते हैं या मारपीट करते हैं तो बच्चे भी यही सीखते हैं। वह अपनी जिद को पूरा करने के लिए गुस्से का सहारा लेते हैं। बच्चे प्यार और अटेंशन की कमी के कारण भी जिद्दी हो सकते हैं। अगर पेरेंट्स अपने बच्चे को पर्याप्त समय नहीं देते हैं तो वह अपनी जरूरतों और इच्छाओं को पूरा करने के लिए जिद का सहारा ले सकते हैं। इसलिए पेरेंट्स को बच्चे की परवरिश में हमेशा इन बातों का विशेष ख्याल रखना चाहिए। ऐसा हो सकता है जिद्दी बच्चों का व्यवहार जिद्दी बच्चे का व्यवहार पेरेंट्स और आसपास के लोगों को परेशान करने वाला होता है। इसमें हर समय कुछ-न-कुछ मांगते रहना, किसी की बात न मानना, हमेशा अपने मन की करना और अपने हमउम्र के बच्चों के साथ लड़ाई-झगड़ा करना समेत कई आदतें शामिल हैं। इसके अलावा जिद्दी बच्चों में और कई नकारात्मक व्यवहार देखने को मिलते हैं। जैसेकि- जिद्दीपन बच्चों के लिए क्यों खतरनाक बच्चे का जिद्दीपन उसकी मेंटल, फिजिकल और सोशल ग्रोथ को प्रभावित कर सकता है। जिद हमेशा पूरी होने से वे अपनी भावनाओं और इच्छाओं को कंट्रोल करना नहीं सीख पाते हैं। इससे वे जीवन में आने वाली चुनौतियों का सामना करने में असमर्थ हो सकते हैं। अगर बच्चे की जिद कंट्रोल न की जाए तो ये उसकी पर्सनैलिटी का हिस्सा बन सकता है। इससे उनका सोशल बिहेवियर प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा कभी-कभी पेरेंट्स बच्चे पर बहुत ज्यादा दबाव डालते हैं कि वह अपनी जिद को कंट्रोल करे। इससे भी बच्चे डिप्रेशन और एंग्जाइटी का शिकार हो सकते हैं। जिद्दी बच्चे को हैंडल करना जरूरी अगर बच्चा आपकी बात नहीं सुन रहा है तो गुस्सा करने के बजाय शांत रहें और उसे प्यार से समझाएं। अगर आप बच्चे को डांटेंगे तो वह और ज्यादा जिद करेगा और आपकी बात नहीं मानेगा। पेरेंट्स बच्चे की अच्छी आदतों के लिए समय-समय पर उसकी तारीफ करें। इससे बच्चे न केवल में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित होंगे, बल्कि वे कुछ नया करने के लिए प्रेरित भी होंगे। इसके अलावा कुछ और बातों का ध्यान रखना जरूरी है। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए- जिद्दी बच्चे की परवरिश में पेरेंट्स इन बातों का रखें ध्यान बच्चे के जिद करने पर गुस्से में आकर उसे मारना-पीटना या चिल्लाना उसकी मेंटल हेल्थ के लिए नुकसानदायक है। इससे बच्चे और पेरेंट्स के रिश्ते में तनाव आ सकता है। इसलिए सजा देने से बेहतर है कि बच्चे को अनुशासन के माध्यम से सिखाएं। जैसेकि-
छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में एक इंटरनेशनल साइबर क्राइम सिंडिकेट का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है. इसके साथ ही इस गिरोह में शामिल चार लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है. इन लोगों ने कंबोडिया स्थित ठगों को कई बैंक अकाउंट मुहैया कराए, जिनमें पीड़ितों से 10 करोड़ रुपए ट्रांसफर कराए गए थे.
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